नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय : कर्जत में 5,000 जरूरतमंदों के लिए बनेगा 100 एकड़ का आश्रय स्थल !
100 एकड़ में 5,000 जरूरतमंदों के लिए आश्रय स्थल: सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक पहल
महाराष्ट्र के कर्जत में रिलायंस फाउंडेशन की ओर से एक बड़ी सामाजिक परियोजना शुरू करने की घोषणा की गई है। 'नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय' नाम की इस परियोजना के तहत लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में अनाथ बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना से करीब 5,000 जरूरतमंद लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्रोजेक्ट में क्या-क्या होगा ?
- लगभग 100 एकड़ में आठ आवासीय गांव।
- 5,000 से अधिक अनाथ बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आजीवन आवास।
- विशेष सुविधाओं वाला अस्पताल।
- फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और पुनर्वास केंद्र।
- शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की सुविधाएं।
- मंदिर, बगीचे, खेल के मैदान, फार्म और वर्कशॉप।
- प्रत्येक निवासी के लिए अलग देखभाल योजना और प्रशिक्षित केयरगिवर्स।
- इस पूरे परिसर में कर्मचारियों, डॉक्टरों और उनके परिवारों सहित लगभग 15,000 लोगों का समुदाय विकसित होने की उम्मीद है।
निश्चित रूप से, अनाथ बच्चों, बेसहारा बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए इस तरह की व्यवस्था का अपना सामाजिक महत्व है। किसी व्यक्ति को केवल आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना भी उतना ही जरूरी है।
भारत में Companies Act, 2013 की धारा 135 और CSR Rules, 2014 के तहत निर्धारित आर्थिक मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों के लिए अपने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत खर्च करना अनिवार्य है।
अर्थात बड़े कॉरपोरेट घरानों की सामाजिक विकास में भागीदारी केवल उनकी व्यक्तिगत इच्छा का विषय नहीं, बल्कि एक कानूनी और संस्थागत जिम्मेदारी भी है। हालांकि, कानून कंपनियों को इस तरह का विशाल आवासीय प्रकल्प बनाने के लिए बाध्य नहीं करता। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, गरीबी उन्मूलन और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में भी CSR के तहत योगदान दे सकती हैं।
असल में, किसी भी बड़े उद्योग या कॉरपोरेट संस्थान की सफलता को केवल उसके कारोबार, मुनाफे और संपत्ति से नहीं मापना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि उसके विकास का लाभ समाज के उन वर्गों तक कितना पहुंच रहा है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पीछे रह गए हैं।
इस परियोजना की वास्तविक सफलता इसके विशाल क्षेत्रफल या इसकी लागत से नहीं, बल्कि इससे मिलने वाले परिणामों से तय होगी। कितने जरूरतमंद लोगों को वास्तव में इसका लाभ मिलता है, उन्हें किस स्तर की चिकित्सा और देखभाल उपलब्ध होती है और लंबे समय तक इन सुविधाओं का संचालन कितनी पारदर्शिता और जिम्मेदारी से किया जाता है, ये सभी बातें महत्वपूर्ण होंगी।
समाज को केवल बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति और उनकी कारोबारी उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक जिम्मेदारी के प्रभावी निर्वहन की भी अपेक्षा रखनी चाहिए। आखिरकार विकास का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसकी रोशनी समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक भी पहुंचे।
Ganesh K Avasthi
Blog Admin
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